नेपाली विमान हादसे में भारत को क्यों फसा रहा था चीन ?

 


नेपाल पोखरा हवाई अड्डे के पास नेपाल का विमान क्रैश हो  गया। 72 सीटों वाले इस विमान में 68 यात्री और 4 पायलट भी सवार थे। विमान में 5 भारतीय लोग भी सवार थे । इस विमान में नेपाल के 53 ,रुस के 4 , कोरिया के 2 और आयरलैंड ,ऑस्ट्रेलिया ,अर्जेंटीना और फ्रांस के 1-1 यात्री इस विमान में सवार थे।



पोखरा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के एक पदाधिकारी ने बताया । कि विमान को हवाईअड्डे पर लैंड करने में सिर्फ 10 से 20 सेकंड ही बचे थे। लैंडिंग ना हो पाने से पहले ही यह विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया ।और यह विमान पूरी तरह से नष्ट हो गया। बताया जा रहा है कि इस विमान में 68 यात्रियों की मौत हो गई है। इस विमान को जिस पोखरा इंटरनेशनल हवाई अड्डे पर लैंड करना था। वह पोखरा इंटरनेशनल हवाई अड्डा चीन ने ही बनाया था। यह पोखरा हवाई अड्डा हाल ही में भारत और नेपाल के बीच कुछ विवादों का कारण भी बन गया था ।इस हवाई अड्डे का उद्घाटन 1 जनवरी के दिन नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल प्रचंड ने किया था।


और तभी से यह हवाई अड्डा विवाद का कारण बन गया था। पोखरा एयरपोर्ट को चीन की ही कंपनी ने तैयार किया था। ताकि चीन किसी तरह भारत के ऊपर नजर रख सके और भारत के ऊपर किसी भी तरह का दबाव बना सके। नेपाल को लग रहा था कि चीन उस पोखरा एयरपोर्ट को नेपाल को किसी मदद के रूप में दे रहा है। लेकिन चीन ने यह सब इनकार करने से मना कर दिया । और चीन ने सबके सामने आकर कहा कि यह एयरपोर्ट मैंने बनाया है। इस एयरपोर्ट में नेपाल सरकार की कोई साझेदारी नहीं है। यह सुनते ही नेपाल सरकार को एक अलग ही झटका लगा। इस मामले में चीन ने साफ कह दिया है। कि यह किसी भी प्रकार की कोई मदद नहीं है। यह प्रोजेक्ट बेल्टन रोड के परियोजना के तहत बनाया गया है।


यह सब सुनते ही नेपाल ने कहा कि ऐसा किसी भी तरह का चीन से कोई समझौता नहीं हुआ था। नेपाल के एक्सपर्ट ने बताया कि अगर इस एयरपोर्ट का प्रयोग पश्चिमी देशों ने चीन के बनाया एयरपोर्ट को मना कर दिया। और भारत के इस चीन के प्रोजेक्ट को बाइकोट कर दिया। तो नेपाल बहुत ही बुरी तरह से चीन के कर्जे वाले जाल में नेपाल फंस जाएगा। और फिर नेपाल भी श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे हाल हो जाएगा।

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